पै एक ऐसी चीज जिसे भिखारी से लेकर बिलियनर तक हर कोई इसे पाना चाहता है. यह सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं पर अपने आप में ही एक नशा है. पैसा एक ऐसी भाषा है जिसे psd का करें. Clak से लेकर अनपढ़ mla तक सब जानते हैं. ये पैसा ही तो है जिसने जंगलों में रहने वाले इंसान को इन बादलों को छुट्टी इमारत से लेकर हवा से भी तेज दौड़ने वाली गाड़ियों में बिठाया. पैसा एक ऐसा कागज का टुकड़ा.
जिसकी खुद में कोई औकात नहीं पर यह आपको दूसरी चीजों की कीमत बताता है. अब सवाल ये है की पैसे में आखिर इतनी ताकत आई कहां से? चलो थोड़ा detail में समझते हैं. आज से हजारों साल पहले इंसान लेनदेन के लिए वा्टर सिस्टम का उसे करता था. जहां एक चीज खरीदने के लिए आपको कोई दूसरी चीज देनी पड़ती थी. यानी किसी के पास चावल है और उसे शुगर चाहिए तो उसे ऐसे इंसान को खोजना होगा जो शुगर बेचना चाहता हो और साथ ही उसे चावल की जरूरत हो. ऐसी कई प्रॉब्लम्स की वजह से.
लोगों ने कुछ अलग सोचा और शुरुआत हुई कमोडिटी की इंसान ने उसे हर एक चीज को पैसा बना दिया जो सबके कम आता था और लोग पशु अनाज topic को और alcohl के जरिए व्यापार करने लगे. But इसमें भी एक दिक्कत थी।. इस बात का पता लगाना बहुत मुश्किल था की मेरे पास जो चीज है उसकी सही कीमत क्या है और commodity.
वक्त के साथ खराब भी हो जाया करती खरीदे जानवर मर जाते अनाज सड़ जाता।. अब इंसान को कोई ऐसी चीज चाहिए जो यूनिवर्सल हो और शुरुआत हुई सोने और चांदी से बने सिक्कों की.
लेकिन इस दो टांग वाले जीव को इसमें भी प्रॉब्लम थी क्योंकि वो वजनदार सोने को लेकर घूमना फिरना और साथ ही चोरी का दर तो कुछ सुनार और दूसरे लोगों ने मिलकर एक उपाय निकाला. उन्होंने लोगों से कहा की तुम अपना सोना हमारे पास रख दो हम उसे संभल कर रखेंगे.
बदले में वो सुनार उसे कागज का टुकड़ा दे देता जिसमें लिखा होता की मेरे पास आपका इतना सोना रखा हुआ है कहा.
मतलब की मैं तुम्हारा कर्जदार हूं जिसे दिखाकर लोग कभी भी अपना सोना वापस ले जा सकते. सबको यह आइडिया काफी अच्छा लगा और लोगों ने अपना सुना उसके पास रखना स्टार्ट कर दिया. लेकिन फिर कुछ टाइम बाद सुनार लोगों को रिलाइज हुआ की यह सिस्टम बनाने के बाद ऑलमोस्ट कोई भी इंसान अपना सोना लेने वापस आता ही नहीं और सब बस उसे रसीद के जरिए ही व्यापार करने लगे द क्योंकि सब को यकीन हो गया था की रसीद है मतलब सोना भी होगा ही. अब ये चीज समझने के बाद सुनार लोगों को लालच ए गई. अब उनके हाथों से बनी रस्सीद ही पैसा बन गया था इसीलिए उन्होंने फर्जी रस्सीद बनाना स्टार्ट कर दी. उनके पास तो सोना होता भी नहीं था लेकिन ऐसे स्टार्ट हुआ दुनिया का सबसे बड़ा लीगल.
जो आज भी चल रहा है वो सोना संभल के रखने की दुकान दुनिया की पहली बैंक की पहली करेंसी माने नोट अगर मैं आपसे पूछूं की एक बैंक कैसे कम करता है तो आप कहोगे की हम जो पैसे बैंक में डिपॉजिट करते हैं उसी से बैंक दूसरों को लोन देता है और उसे परे कुछ इंटरेस्ट चार्ज करके.
बैंक प्रॉफिट कमाता है सिंपल राइट. अब एक्सप्लेनेशन के हिसाब से बैंक की ऑपरेशन कुछ ऐसे होगी जैसे कल सुबह आप एक हज़ार डिपॉजिट करने के लिए बैंक प गए अपने पाँच सौ के नोट बैंक में जमा करवा. उसके बाद बैंक क्या करेगी. वो अपने रूल के हिसाब से दस प्रतिशतश रिजर्व रखेगी और बाकी के नौ सौ किसी और को लोन पे दे देगी. और अगर ये बैंक उसे लोन वाले इंसान से ईर्ली बारह प्रतिशत इंटरेस्ट चार्ज करती है और आपकोर्ली चार प्रतिशत इंटरेस्ट देती है तो बीच का जो आठ प्रतिशत बचा वो हुआ उनका मुनाफा.
राइट इसी बेसिक प्रिंसिपल पे दुनिया के सारे कमर्शियल बैंक्स ऑपरेट करते हैं लेकिन बैंक्स बस ऐसे ही पैसा नहीं कमाते. इसके पीछे एक बहुत बड़ी गेम छुपी है जो मैक्सिमम लोगों को नहीं पता और वो गेम यह है की बैंक आपके एक हज़ार की डिपॉजिट को आराम से दस हज़ार बनाके उससे बिजनेस कर सकती है. और वो कैसे होता है चलो समझते हैं मानो आप एक हज़ार बैंक में जाके डिपॉजिट करते हो. बैंक अपने रूल के हिसाब से दस प्रतिशत केस रिज़र्व रखेगी और बाकी के नौ सौ किसी को लोन पे दे देगी. पर ध्यान से देखिए यहां हुआ क्या.
पैसे डिपॉजिट करने के बाद अगर आपका बैलेंस चेक करोगे तो आपको वही एक हज़ार दिखाया. और इधर जिस इंसान ने लोन के लिए अप्लाई किया था और बैंक ने उसे लोन दिया वह भी अपना बैलेंस चेक करेगा तो उसको भी नौ सौ दिखाई देंगे. इसका मतलब आप दोनों के हाथों में एक हज़ार और नौ सौ की परचेसिंग पावर है. जबकि एक्चुअली उसे बैंक के पास बस एक ही कैश है. मतलब उसे बैंक ने बस अपने कंप्यूटर पर कुछ नंबर्स टाइप करके मार्केट में एक्स्ट्रा नौ सौ की करेंसी क्रिएट कर दी जो की ऑफ कोर्स वल उसे बैक करने के लिए कोई कैस तो है नहीं और यह खेल.
सिर्फ यहां खत्म नहीं होता ये बहुत आगे जाता है. जैसे-जै इंसान ने नौ सौ का lोn apply किया था उसने ऐसे ही तो लोन aply नहीं किया होगा उसे भी वो नौ सौ रुपए कुछ खरीदने के लिए चाहिए होंगे. और जब ये पैसा खर्च करेगा तो ये पैसा सिंपली उसके अकाउंट से ट्रांसफर होके किसी और के अकाउंट में जाके डिपॉजिट हो जाएगा. और बैंक फिर से इस नौ सौ का दस प्रतिशत रखेगा और बाकी के आठ सौ दस फिर से किसी और को लोन पे दे देगा. ऐसा करते-करते एक बैंक.
बस एक हज़ार डिपॉजिट को दस हज़ार तक वर्चुल करेंसी में कन्वर्ट करके बिजनेस करती है. आपको लगता है की बैंक मेंफ है जिसे आप जब.
एकदम सच नहीं है अगर सिर्फ बीस से तीस प्रतिशत लोग भी एक साथ पैसा निकलने जाए तो बैंक आपको आपके पूरे पैसे वापस नहीं कर पाएगा क्योंकि उनके पास आपके सारे पैसे होते ही नहीं फ्रेक्शनल रिजल्व सिस्टम की वजह से वो सिर्फ प्रोबेबिलिटी पे चलती है फॉर एग्जांपल अगर आप इस दुनिया के सारे बैंक अकाउंट के.
बैंक बैलेंस को ऐड करें और वो एक सौ होते हैं तो उसमें से दस से भी कम एक्चुअल केस में अवेलेबल है. बाकी के नब्बे प्रतिशत से भी ज्यादा. बस वर्चुअल डिजिटल है जिसे बस आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर देख सकते हो. बॉस पैसों की इस मायाजाल को जानबूझकरcmम्पlिकेटeेड बनाया.
समझ ना पाए और वो इस सिस्टम में ही फंसा रहे. लोगों को लगता है की करेंसी और मणि एक ही चीज है लेकिन ऐसा है नहीं. करेंसी एक मीडियम ऑफ एक्सचेंज है जबकि मणि खुद वैल्युएबल एसेट है. आपके घर में पड़ा एक हज़ार के नोटों का बंडल रातों रात कागज हो जाएगा. अगर गवर्नमेंट उसे ना मंजूर कर दे क्योंकि वो करेंसी है लेकिन आपके घर में पड़ा सोने का सिक्का चाहे दुनिया की कोई भी गवर्नमेंट कुछ भी बोल दे उसकी वैल्यू उतनी ही रहेगी जितनी वो है. देखो बॉस दूसरे इन्फ्लुएंसर्स आपको जो भी बोले की गोल्ड बॉन्ड खरीदो, डिजिटल गोल्ड लो.
गोल्ड के एटीएफ में पैसा लगाओ ये करो वो करो वरना फलाना tex लगेगा, ठिकाना tex लगेगा. मैं कहूंगा real gold भी खरीदो क्योंकि life के कुछ डिसीजंस टैक्स के आधार पर नहीं लिए जाते. अब आपके पास कहां पाँच हज़ार करोड़ है की आपको चौबी परसेंट टैक्स की भी फिक्र करनी पड़े. और सच तो यह है कि पांडेमिक के टाइम रियल माल ही काम आता है. आप किसी को अपना गोल्ड बॉन्ड का सर्टिफिकेट दिखा के पूरे साल का राशन नहीं खरीद सकते. लेकिन घर में पड़े सोने का एक छोटा सा हिस्सा फेंक के पूरे साल का बंदोबस्त किया जा सकता है. कागज.
सिर्फ भरोसा है, और भरोसे पे ही दुनिया कायम है.

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